हम जिस घर में रहते हैं सामान्य रूप से उसके भी कुछ नियम कायदे होते हैं। जैसे-घर का कोई सदस्य सुबह सात बजे के बाद नहीं सोएगा। दोपहर का खाना दो बजे तक खा लेना होगा। रात 10 बजे के बाद कोई बाहर नहीं रहेगा आदि।

यदि चुनाव की बात करें तो इससे जुड़े नियम कानूनों को, जिन्हें चुनाव आयोग तैयार करता है, चुनावी आचार संहिता पुकारा जाता है। प्रत्येक दल के प्रत्याशी एवं सरकार को भी इस नियमावली का चुनाव के दौरान पालन करना होता है।

आचार संहिता वस्तुतः किसी व्यक्ति अथवा संस्था के आचरण को नियंत्रित करती है। प्रत्येक कार्यालय की अपनी एक आचार संहिता अथवा कोड आफ कंडक्ट होता है। सामान्य रूप से चुनाव के समय आचार संहिता बहुत चर्चा में रहती है। इसे चुनावी आचार संहिता पुकारा जाता है।

यह वस्तुतः एक नियमावली होती है, जिसे देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग तैयार करता है। राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिए चुनाव के दौरान इस आचार संहिता का पालन करना आवश्यक होता है।

अंग्रेजी में इसे माडल इलेक्शन कोड आफ कंडक्ट (model election code of conduct) भी कहा जाता है। चुनाव से ऐन पहले चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता लागू होने की घोषणा करता है। चुनाव पश्चात इसकी समाप्ति हो जाती है।

एक समय ऐसा भी था, जब चुनाव के दौरान दिन भर और रात भर लाउडस्पीकर बजता था। लोगों के घरों की दीवारें पोस्टरों, बैनरों से पट जाया करती थीं। शराब एवं पैसे के बूते दबंग प्रत्याशी वोट खरीदते थे। कहीं कहीं तो पोलिंग बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं भी होती थीं।

उत्तर प्रदेश एवं बिहार इस मामले में खासे बदनाम थे। कई बार लाठी, गोली चल जाती थी। ऐसी घटनाओं को पर रोकथाम के लिए एक आचार संहिता की आवश्यकता महसूस हुई। यद्यपि आचार संहिता लागू होने के बाद भी इस प्रकार की घटनाएं पूरी तरह नहीं रूकीं, लेकिन उनमें बहुत कमी आई है।

आज से करीब 21 वर्ष पूर्व सन 2001 में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने एक फैसले में साफ कहा कि चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन (notification) जारी होने की तिथि से चुनावी आचार संहिता को लागू माना जाएगा।

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